जिला ग्रामीण विकास एजेंन्सी,
नारनौल (जिला महेंन्द्रगढ़)

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी कार्यक्रम (एमजी.एन.आर.ई.जी.एस.)

 

          भारत/हरियाणा सरकार द्वारा हरियाणा ग्रामीण रोजगार गारन्टी स्कीम का शुभारम्भ दिनांक 2 फरवरी 2006 से जिला महेंन्द्रगढ़ व सिरसा में किया गया हैं। इस स्कीम का मुख्य उदेश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले ऐसे परिवार जो अकुशल मजदूरी का कार्य करने के इच्छुक हों, एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों का रोजगार उपलब्ध करवाना हैं। जिला महेंन्द्रगढ में दिनांक 31.7.2010 तक कुल 54570 परिवारों ने अपना पंजीकरण ग्राम पंचायतों के पास कराया हैं इन सभी परिवारों को जॉब कार्ड वितरित कर दिये है। इन पंजीकृत परिवारों में से वर्ष 2010-11 में जुलाई, 2010 तक कुल 2928 परिवारों के 3039 व्यक्तियों को रोजगार उपलब्ध करवा दिया गया हैं। इस स्कीम के अन्तर्गत 286 कार्यो पर कार्य शुरू किया गया हैं, इनमें से 131 कार्य पूर्ण हो चुके है तथा 155 कार्य प्रगति पर हैं। इस स्कीम में जल संरक्षण हेतू जोहडों की खुदाई, जोहडों में पानी लाने के लिए नालों का निर्माण, गांवों को सडक तक जोडने के लिए संपर्क मार्ग, पौधारोपण, बांधों की मुरम्मत एवं भूमि सममतल का कार्य करवाया जा रहा हैं।

          इस स्कीम के अन्तर्गत विभिन्न कार्यो पर कुल प्राप्त राच्चि 1128.14 लाख रू. में से 382.27 लाख रू. की राच्चि खर्च की जा चुकी हैं जो कुल उपलब्ध राशि का 33.88 प्रतिशत है। चालू वित्तिय वर्ष के दौरान कुल 1.06 लाख मानव दिवस अर्जित किए जा चुके हैं तथा 37 परिवारों को अब तक 100 दिन का रोजगार उपलब्ध करवाया जा चुका है।  
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पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि (BRGF)


          पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि के अन्तर्गत जारी विकास सहायता राशि का उपयोग अन्य महत्वपूर्ण कदम उठाये जाने के बावजूद भी रह गए अन्तर को दूर करने के लिए किया जाएगा। पंचायतें और अन्य शहरी स्थानीय निकाय इस धनराशि का उपयोग संविधान की ग्यारवीं और बारहवीं अनुसूची के अनुसार उन्हें सौंपे गये किसी भी कार्य के लिए कर सकते हैं। इस धनराशि का उपयोग धार्मिक स्थलों या ऐसे स्थलों के परिसर में इमारतों के निमार्ण, स्वागत द्वार बनाने या फिर किसी व्यक्ति अथवा परिवार को सहायता देने में नही किया जा सकता। अनुसूचित जातियों और जनजातियों के विकास के लिए सामुदायिक हाल, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति बच्चों के लिए इन्टरमीडिएट आवासीय कालेज/हास्टल, आई.टी.आई., ग्रामीण खेलमैदान, प्रख्यात गैरसरकारी संगठनों जिनके पास लडकियों के लिए सेकेन्ड्री स्कूल/कालेज स्थापित करने के लिए भूमि है, को एक समय का अवलंबन ( लगभग 20 लाख रू. ), 20 छोटे/सीमांत अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के किसानों के स्वयं सहायता समूह के लिए ट्राली सहित ट्रैक्टर तथा कृषि यन्त्र, कम्प्यूटर, मोबाईल फोन की मरम्मत, ड्राइविंग आदि जैसे क्षेत्रों में शिक्षित युवाओं का प्रशिक्षण, अर्धसैनिक तथा अन्य सुरक्षा बलों के लिए भर्ती से पूर्व प्रशिक्षण, दुकानों का निर्माण तथा आबंटन आदि के लिए राशि उपलब्ध करायी जा सकती है।

          फलैगशीप कार्यक्रम के साथ जुड़ी स्थानीय अवसंरचना में अन्तर पाटना : इस कार्यक्रम के तहत अन्तर पाटने के लिए कुछ चयनित उदेश्यो को प्राप्त करने के लिए संवेदनशील क्रिया बनाया जा सकता है चाहे बी.आर.जी.एफ का लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर पर स्थानीय अवसंरचना में अन्तर पाटने का क्यों न हो। पंचायतों के विकल्प पर भारत निर्माण के तहत स्थानीय अवसंरचना में महत्वपूर्ण अन्तर दूर करने के लिए ग्राम विद्युतीकरण, जल आपूर्ति हेतू पाईप लाईन बिछाना, इंदिरा आवास योजना का विस्तारन को शामिल किया जा सकता है। बी.आर.जी.एफ सहायता को उपयुर्क्त भारत निर्माण लक्ष्यों के साथ जोडा जा सकता है ऐसे क्षेत्र है, ग्रामीण सडकें, टेलीफोन एवं लघु सिंचाई जिसमें अन्य संसाधनों से निवेश उपलब्ध कराये जाएंगे जैसे कि प्रधानमन्त्री ग्रामीण सडक योजना (सडकें), भारत सरकार-यू एस ओ निधि (ग्रामीण टेलीफोन के लिए ) तथा एनआरइजीए (सूक्ष्म सिंचाई तथा नहरों के लिए )।

          वर्ष 2010-11 के लिए कुल 13.02 करोड रू० की राशि आंबटित है, जो कि अभी तक प्राप्त होनी शेष है । इस जिलें में अब तक कुल प्राप्त राशि 279.00 लाख रू० में 152.00 लाख रू० की राशि खर्च की जा चुकी है।

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इंदिरा आवास योजना (आई०ए०वाई०)
 
          इन्दिरा आवास योजना के तहत उन आवासहीन ग्रामीणों को मकान बनाने हेतु 45000/-रू० की राशि दी जाती है जिनका नाम ग्राम सभा द्वारा अनुमोदित होता है तथा उनका नाम गरीबी रेखा की सूची में दर्ज होता है ।

          वर्ष 2010-11 के लिए जिला महेन्द्रगढ़ में 861 नए मकान बनाने हेतु 350.23 लाख रू० निर्धारित किये गये हैं तथा माह जुलाई तक 92.35 लाख रू० की राशि खर्च की जा चुकी है।

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वाटरशेड विकास कार्यक्रम (डी०डी०पी०)
 

           इस योजना के अन्तर्गत मरूस्थल को बढ़ने से रोकने तथा भू एवं जल संरक्षण हेतु वाटरशेड विकास परियोजनाएं भारत सरकार ने शुरू की हैं । वाटरशेड विकास कार्यक्रम का मुखय उद्‌देश्य प्राकृतिक संसाधनों जैसे भूमि, जल, वनस्पति आदि का अधिकतम सदुपयोग करना, रोजगार के अवसर पैदा करना, लोगों का आर्थिक व सामाजिक स्तर सुधारना, लोगों की कार्यों मे भागीदारी सुनिश्चित करना तथा साधारण आसान, वहनीय तकनीकी हल द्वारा समस्याओं को दूर करना है । यह योजना इस जिले में वर्ष 1995-96 में शुरू की गई थी । प्रत्येक वाटरशेड विकास परियोजना के अन्तर्गत 500 है० का क्षेत्र वाटरशेड विकास हेतु लिया जाता है । संशोधित दिशा निर्देश वर्ष 2001 के अनुसार अब वाटरशेड पर 30.00 लाख रुपये की राशि खर्च की जाती है । परियोजना अवधि 5 वर्ष है । 80 प्रतिशत राशि विकास कार्यों पर, 5 प्रतिशत राशि प्रशिक्षण, 5 प्रतिशत राशि सामुदायिक सगंठन तथा 10 प्रतिशत राशि प्रशासनिक मद पर खर्च की जाती है । निजी भूमि पर कार्य करवाने के लिए भू-स्वामी को 10 प्रतिशत अंशदान जमा करवाना होता है तथा पंचायत एवं सामुदायिक भूमि पर कार्य के लिए 5 प्रतिशत अंशदान संबंधित पंचायत द्वारा करवाया जाता है । इस सभी अंशदान को वाटरशेड विकास फंड में जमा करवा दिया जाता है । इसका उपयोग वाटरशेड पूर्ण होने के बाद बनाये गये परिसम्मतियों रख-रखाव पर खर्च किया जाता है ।

           वर्ष 2003-4 से इस कार्यक्रम का नाम हरियाली हो गया है जिसके अलग से दिशा निर्देश भारत सरकार से आये हैं । हरियाली में संबंधित ग्राम पंचायतें ही कार्य करवाती हैं । हरियाली के अन्तर्गत 4 बैचों में 51 परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं जिनमें से 22 वाटरशेड पूर्ण हो चुके हैं तथा हरियाली तृतीय व चतुर्थ बैच के 29 वाटरशेडों की अन्तिम किस्त का सदुपयोग किया जाना शेष है। अब तक कुल उपलब्ध राशि 41.07 लाख रू० है, जिसमें से अभी तक कोई खर्च नही हुआ है ।
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स्वर्णजयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (एस०जी०एस०वाई०)
 

           इस कार्यक्रम को पूर्ववर्ती समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम तथा इसके सहायक कार्यक्रमों अर्थात ट्राईसम, ड्‌वाकरा, सिटरा, जी.के.वाई. तथा एम.डब्लूय.एस. का पुनर्गठन करने के पश्चात 1.4.1999 से आरंभ किया गया था। एस.जी.एस.वाई. के शुरू होने के साथ पहले वाले कार्यक्रम बंद हो गए हैं। एस.जी.एस.वाई. का मूल उद्‌देश्य बैंक ऋण और सरकारी सबसिडी के जरिए आय सृजक परिसम्पत्तियां उपलब्ध करवाकर गरीब परिवारों (स्वरोजगारियों) को गरीबी की रेखा से ऊपर लाना हैं। कार्यक्रम का लक्ष्य गरीबों की क्षमता और संभाव्यता के आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों में काफी संख्या में छोटे-छोटे उद्यम स्थापित करना हैं।

           एस.जी.एस.वाई. के कार्यान्वयन के लिए स्वरोजगार के सभी पहलुओं अर्थात ग्रामीण गरीबों के स्व-सहायता समूहों का गठन तथा उनकी कार्य क्षमता बढ़ना, समूहगत गतिविधियों की योजना बनाना, बुनियादी ढाँचे तथा प्रौद्योगिकी और विपणन सहायता को शामिल करके स्वरोजगार के एक व्यापक कार्यक्रम के रूप में परिकल्पना की गई हैं।

           स्वयं-सहायता समूहों के लिए एस.जी.एस.वाई. के अन्तर्गत सहायता सरकार द्वारा सबसिड तथा बैंक द्वारा ऋण के रूप में दी जाती हैं। ऋण एस.जी.एस.वाई. का महत्वपूर्ण घटक हैं, सबसिडी अपेक्षाकृत छोटा और शक्तिदायक तत्व हैं। तद्‌नुसार एस.जी.एस.वाई. में बैकों की व्यापक भागीदारी की परिकल्पना की गई हैं।

           इस योजना के अन्तर्गत 10 से 20 गरीब रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों के व्यक्तियों का एक समूह बनाया जाता हैं। यह समूह महिलाओं, पुरूषों तथा दोनों का मिलाजुला भी हो सकता हैं। शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के मामले में 5 व्यक्तियों का भी समूह बनाया जा सकता हैं। स्वयं सहायत समूह छोटी-छोटी बचत करते है तथा इस बचत के माध्यम से वह अपनी आकस्मिक आवश्कताओं का पूरा करने के लिए ऋण प्राप्त करके आपस में लेन-देन करते हैं तथा इसका रिकार्ड आदि रखते हैं। 6 माह के बाद स्वयं सहायता समूह यदि ठिक प्रकार से कार्य कर रहा होता है तो वह प्रथम ग्रेड पास कर जाता है और ग्रुप की बचत राशि का चार गुणा तक रिवोलविंग फंड के रूप में दिये जाते हैं। रिवोलविंग फंड मिलने के 6 माह बाद उस स्वयं सहायता समूह की द्वितीय ग्रेडिंग की जाती है और यदि वह ग्रुप ठीक प्रकार से कार्य कर रहा होता है तो उसे बैंक से ऋण उपलब्ध करवाया जाता है तथा डीआरडीए द्वारा ग्रुप को कुल ऋण का 50 प्रतिशत या 1.25 लाख रू. या दस हजार रू. प्रति सदस्य, जो भी कम हो अनुदान भी दिया जाता हैं।

           इस स्कीम के अन्तर्गत जुलाई, 2010 तक कुल उपलब्ध राशि 62.64 लाख रू० में से 34.68 लाख रू० की राशि खर्च की जा चुकी हैं।

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संसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS)
 

           संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना, एक योजना है, जिसके लिए निधि पूरी तरह भारत सरकार द्वारा दी जा रही हैं। इसके अन्तर्गत माननीय सांसद लोकसभा द्वारा अपने निर्वाचन क्षेत्रों के लिए विकास कार्यो की अनशंसा कर सकते हैं। राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य, अपने राज्य के एक या अधिक जिलों में कार्यान्वयन हेतू कार्यो की अनुशंसा कर सकते हैं। लोक सभा एवं राज्य सभा के मनोनीत सदस्य देश में कही भी एक या अधिक जिलों में कार्यान्वयन हेतू कार्यो की अनुशंसा कर सकते है। इस स्कीम के अन्तर्गत इस जिले में लोक सभा एवं राज्यसभा के माननीय संसद सदस्यों द्वारा विभिन्न विकास कार्यो के लिए समय समय पर अनुशंसा एवं राशि प्राप्त होती रहती है, जिसके फलस्वरूप जिले में विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। अब तक कुल 4.42 लाख रु० की राशि में से 1.00 लाख रु० की राशि खर्च की जा चुकी है ।

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सम्पूर्ण स्वच्छत्ता अभियान
 
           सम्पूर्ण स्वच्छत्ता अभियान इस जिले में वर्ष 2004-05 के दौरान शुरू किया गया था । इसकी परियोजना अवधि पांच वर्ष है । इसके अन्तर्गत सार्वजनिक महिला शौचालय, स्कूल शौचालय, आंगनवाड़ी शौचालय तथा निजी पारिवारिक शौचालयों का निर्माण किया जाता है । महिला सार्वजनिक शौचालय के लिये 30,000/- रु० की राशि संबंधित पंचायत द्वारा अशंदान के रूप में जमा करवाई जाती है । इसकी कुल लागत 1.50 रू० होती है । स्कूल शौचालय की लागत 20,000/- रु० है । आंगनवाडी शौचालय के लिये 5,000/- की लागत है । व्यक्तिगत शौचालय के लिये गरीबी रेखा से नीचे जीवन व्यापन करने वाले परिवारों को शौचालय निर्माण तथा उसके प्रयोग शुरू करने उपरान्त 2200/- रु० प्रोत्साहन के रूप में दी जाती है । इस अभियान के अन्तर्गत स्वच्छत्ता की जरूरत पैदा करने पर जोर दिया गया है ।

           दिनांक 31.7.2010 तक कुल 17.19 लाख रू० की उपलब्ध राशि में से कोई राशि खर्च नही की गई है।

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समन्वित ग्रामीण ऊर्जा कार्यक्रम (आई०आर०ई०पी०)
 

           जिला महेन्द्रगढ़ में समन्वित ग्रामीण ऊर्जा कार्यक्रम वर्ष 1990-92 में खण्ड महेन्द्रगढ में तथा वर्ष 1991-92 में खण्ड अटेली में प्रारम्भ किया गया । इस कार्यक्रम का मुख्य उद्‌देश्य वर्तमान एवं भविष्य की ऊर्जा बचत एवं पर्यावरण सुरक्षा है । वर्तमान ऊर्जा की कमी को पूरा करने के लिए ऊर्जा बचत संयंत्र जैसे बायोगैस प्लांट, सी०एफ०एल०, वाटर हिटिंग सिस्टम, सोलर कुकर, एस.पी.वी. लेन्ट्रन, एस.पी.वी. होम लाईटिंग सिस्टम, एस.पी.वी. स्ट्रीट लाईट, इत्यादि विशेष अनुदान पर ग्रामीणों को वितरित किये जाते हैं तथा ऊर्जा बचत व पर्यावरण सुरक्षा के बारे में को समय-समय पर विभाग द्वारा ग्रामीणों को जानकारी दी जाती है ।

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स्वर्ण जयन्ती शहरी रोजगार योजना (S.J.S.R.Y)
 
           एस.जी.एस.वाई. जिला महेंन्द्रगढ़ के शहरी क्षेत्रों (नारनौल, महेंन्द्रगढ , कनीना एवं अटेली) में चलाई जा रही हैं। इसके अन्तर्गत शहरी क्षेत्रों में गरीबी रेखा से नीचे जीवन व्यापन करने वाले परिवारों के सदस्यों को ऋण एवं अनुदान उपलब्ध करवाया जाता है, विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है एवं 10-25 महिलाओं के समूह बनाकर उन्हें विभिन्न कार्यो के लिए समूह ऋण दिया जाता है। छोटी-छोटी बचत के लिए भी समूहों को प्रेरित किया जाता हैं। इन समूहों के अच्छी प्रकार से चलने उपरान्त रिवॉलविंग फन्ड भी दिया जाता है। इसके अतिरिक्त इस योजना के अन्तर्गत विभिन्न प्रकार के विकास कार्य जैसे सडकें एवं नालियां बनाना, पार्क निर्माण इत्यादि भी करवाए जाते हैं।
 
 
 
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